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रोजाना खाली पेट मेथी-पानी पीना, खाली पेट लहसà¥à¤¨ खाना à¤à¥€ फायदेमंद माना जाता है।
जलोदर में कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ :-
जलोदर की बीमारी में रोगी को à¤à¤¸à¥‡ पदारà¥à¤¥ अधिक खाने चाहिठजिनसे कि पेशाब अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में आठतथा पेशाब साफ हो। जलोदर रोग से पीड़ित रोगी को अपनी पाचनकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को ठीक करने के लिठपà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक चिकितà¥à¤¸à¤¾ से उपचार करना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जब पाचनकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ ठीक हो जाà¤à¤—ी तà¤à¥€ यह रोग ठीक हो सकता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को पानी कम पीना चाहिà¤, पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लग रही हो तो उसे दही का पानी, ताजा मटà¥à¤ ा, फलों का रस तथा गाय के दूध का मकà¥à¤–न देना चाहिà¤à¥¤
लहसà¥à¤¨-लहसà¥à¤¨ का रस à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š 125 गà¥à¤°à¤¾à¤® पानी में मिलाकर तीन बार नितà¥à¤¯ पिलाने से जलोदर दूर होता है। यह कà¥à¤› दिन पिलाना चाहिà¤à¥¤
आम–आम खाने से जलोदर में लाठहोता है। नितà¥à¤¯ दो-दो आम तीन बार खायें।
चना-25 गà¥à¤°à¤¾à¤® चना, 250 गà¥à¤°à¤¾à¤® पानी में औटा (Boiled) कर आधा पानी रहने पर, इसका पानी छान कर पीने से लाठहोता है। यह लगातार तीन सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तीन बार रोजाना पीयें।
पà¥à¤¯à¤¾à¤œ-कचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤¯à¤¾à¤œ बार-बार खाने से पेशाब जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है और जलोदर के लिठयह à¤à¤• अचà¥à¤›à¥€ औषधि है। यहाठबताई चीजें अधिक-से-अधिक संखà¥à¤¯à¤¾ में लें।
करेला-25 गà¥à¤°à¤¾à¤® करेले का रस आधा कप पानी में मिलाकर नितà¥à¤¯ तीन बार पिलाने से à¤à¥€ लाठहोता है।
मूली–मूली के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का रस आधा कप थोड़ा-सा पानी मिला कर तीन बार नितà¥à¤¯ पीने से जलोदर में लाठकरता है।
मेथीदाना मेथी की सबà¥à¤œà¥€ या à¤à¤¿à¤—ोया हà¥à¤† पानी पीना जलोदर में लाà¤à¤•ारी है।
गाजर-गाजर का रस, छाछ, खरबूजे का सेवन जलोदर में उपयोगी है।
पिपà¥à¤ªà¤²à¥€ दूध में उबाल लें, फिर छान कर 2-3 बार पिà¤à¤‚।
पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लगने पर पानी की जगह मकà¥à¤–न निकला हà¥à¤† मटà¥à¤ ा, मीठे अनार का रस, मूली के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ और गाजर का रस सेवन करें।
साग-सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में करेला, लाल सहिजन, मूली, लहसà¥à¤¨, कासनी, पà¥à¤¯à¤¾à¤œ, मकोय, परवल, पालक, शलगम आदि खाà¤à¤‚।
फलों में आम, अंजीर, मीठे अनार, खरबूजा, पपीता आदि का सेवन करें।
à¤à¥‹à¤œà¤¨ में पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ चावल का à¤à¤¾à¤¤, मूंग की दाल, जौ का मांड़ पियें ।
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